जब हम कैंसर के बारे में सोचते हैं, तो अक्सर हमारे दिमाग में तंबाकू, शराब या खराब जीवनशैली जैसे कारक आते हैं। हालांकि, एक नई रिपोर्ट हमें चौंकाती है: दुनिया भर में कैंसर के हर आठवें मामले का कारण इन्फेक्शन है, जिसमें 2024 में 23 लाख नए मामले सामने आए हैं। यह आंकड़ा इस बात पर जोर देता है कि संक्रमण भी कैंसर का एक महत्वपूर्ण, लेकिन अक्सर अनदेखा किया जाने वाला कारण है। आइए आज हम कैंसर और संक्रमण के इस गहरे संबंध को समझते हैं और जानते हैं कि कैसे हम इन छिपे हुए खतरों से खुद को बचा सकते हैं।
हाल ही में जारी एक वैश्विक रिपोर्ट ने इस धारणा को चुनौती दी है कि कैंसर केवल जीवनशैली से जुड़ी बीमारी है। रिपोर्ट बताती है कि दुनिया भर में कैंसर के कुल मामलों में से लगभग 15% का संबंध विभिन्न प्रकार के संक्रमणों से है। यह संख्या लाखों लोगों को प्रभावित कर रही है, जो जीवनशैली से हटकर एक गंभीर पहलू को उजागर करती है। यह जानकारी हमें कैंसर की रोकथाम और शीघ्र पहचान के नए तरीकों पर विचार करने में मदद करती है।
कई तरह के संक्रमण कैंसर के विकास में भूमिका निभा सकते हैं, लेकिन कुछ ऐसे हैं जो विशेष रूप से खतरनाक माने जाते हैं। यहां हम पांच ऐसे प्रमुख संक्रमणों के बारे में बात करेंगे:
एचपीवी दुनिया में सबसे आम यौन संचारित संक्रमणों में से एक है। इसे अक्सर केवल सर्वाइकल कैंसर से जोड़ा जाता है, लेकिन यह गुदा, मुख और गले के कैंसर जैसे कई अन्य कैंसर का कारण भी बन सकता है। एचपीवी के कुछ प्रकार कोशिकाओं के डीएनए को बदलकर उन्हें असामान्य रूप से बढ़ने के लिए प्रेरित करते हैं। अच्छी खबर यह है कि एचपीवी संक्रमण और संबंधित कैंसर को रोकने के लिए प्रभावी टीके उपलब्ध हैं।
हेपेटाइटिस बी (HBV) और हेपेटाइटिस सी (HCV) वायरस मुख्य रूप से लिवर को संक्रमित करते हैं। यदि ये संक्रमण लंबे समय तक बने रहते हैं, तो वे लिवर में गंभीर सूजन, निशान (सिरोसिस) और अंततः लिवर कैंसर (हेपेटोसेलुलर कार्सिनोमा) का कारण बन सकते हैं। हेपेटाइटिस बी के लिए टीका उपलब्ध है, जबकि हेपेटाइटिस सी का अब प्रभावी ढंग से इलाज किया जा सकता है।
हेलिकोबैक्टर पाइलोरी (एच. पाइलोरी) एक बैक्टीरिया है जो पेट की परत में रहता है और अक्सर पेट के अल्सर का कारण बनता है। लंबे समय तक एच. पाइलोरी संक्रमण पुरानी सूजन को जन्म दे सकता है, जिससे पेट के कैंसर (गैस्ट्रिक कैंसर) और पेट के लिंफोमा का खतरा बढ़ जाता है। इस बैक्टीरिया का पता लगाना और एंटीबायोटिक दवाओं से इसका इलाज करना संभव है।
एपस्टीन-बार वायरस (EBV) मोनोन्यूक्लियोसिस का कारण बनता है। कुछ मामलों में, EBV विशिष्ट प्रकार के कैंसर से जुड़ा होता है, जैसे बुर्किट लिंफोमा, हॉजकिन लिंफोमा और नासोफैरिंजियल कार्सिनोमा। यह वायरस प्रतिरक्षा प्रणाली की कोशिकाओं को प्रभावित कर सकता है और उन्हें अनियंत्रित रूप से बढ़ने के लिए प्रेरित करता है।
एचआईवी (HIV) वह वायरस है जो एक्वायर्ड इम्यूनोडेफिशिएंसी सिंड्रोम (एड्स) का कारण बनता है। एचआईवी संक्रमण प्रतिरक्षा प्रणाली को कमजोर कर देता है, जिससे शरीर अन्य संक्रमणों और कुछ कैंसर से लड़ने की अपनी क्षमता खो देता है। एचआईवी से संक्रमित लोगों में कुछ प्रकार के कैंसर का खतरा बढ़ जाता है, जिनमें कपोसी सार्कोमा, गैर-हॉजकिन लिंफोमा और सर्वाइकल कैंसर शामिल हैं। एंटीरेट्रोवाइरल थेरेपी (ART) एचआईवी को नियंत्रित करने में मदद कर सकती है।
संक्रमण कई तरीकों से कैंसर को जन्म दे सकते हैं:
अच्छी खबर यह है कि इन संक्रमणों से बचाव के लिए कई प्रभावी उपाय उपलब्ध हैं:
एक मजबूत प्रतिरक्षा प्रणाली संक्रमणों से लड़ने और कैंसर के जोखिम को कम करने में मदद करती है। संतुलित आहार, नियमित व्यायाम, पर्याप्त नींद और तनाव प्रबंधन सभी इसमें योगदान करते हैं।
यदि आपको इनमें से किसी भी संक्रमण के लक्षण महसूस होते हैं या कैंसर से संबंधित कोई भी असामान्य लक्षण (जैसे unexplained weight loss, chronic fatigue, persistent pain, new lumps or skin changes) दिखाई देते हैं, तो तुरंत डॉक्टर से सलाह लें। शीघ्र निदान और उपचार गंभीर परिणामों को रोक सकते हैं।
संक्षेप में, कैंसर के पीछे केवल जीवनशैली के कारक ही नहीं, बल्कि अनदेखे संक्रमण भी एक बड़ी भूमिका निभाते हैं। एक नई रिपोर्ट के अनुसार, 2024 में 23 लाख से अधिक कैंसर मामले संक्रमण से जुड़े थे। इन संक्रमणों के बारे में जागरूकता बढ़ाना, टीकाकरण कराना, स्वच्छता बनाए रखना और नियमित स्वास्थ्य जांच कराना हम सभी के लिए महत्वपूर्ण है। अपनी सेहत के प्रति जागरूक रहकर ही हम इन छिपे हुए खतरों से खुद को और अपने प्रियजनों को बचा सकते हैं। याद रखें, जानकारी ही बचाव की कुंजी है!
नहीं, हर इन्फेक्शन कैंसर का कारण नहीं बनता है। कैंसर से जुड़े संक्रमण विशेष प्रकार के होते हैं जो लंबे समय तक शरीर में रहकर कोशिकाओं को नुकसान पहुंचाते हैं या प्रतिरक्षा प्रणाली को कमजोर करते हैं। अधिकांश सामान्य संक्रमण कैंसर का जोखिम नहीं बढ़ाते हैं।
इन संक्रमणों का पता विशिष्ट परीक्षणों से चलता है। उदाहरण के लिए, एचपीवी के लिए पैप टेस्ट और डीएनए टेस्ट, हेपेटाइटिस बी और सी के लिए ब्लड टेस्ट, और एच. पाइलोरी के लिए एंडोस्कोपी या ब्रेथ टेस्ट किए जाते हैं। एचआईवी का पता ब्लड टेस्ट से चलता है।
हाँ, इन्फेक्शन से होने वाले कैंसर का इलाज अन्य प्रकार के कैंसर की तरह ही संभव है, खासकर यदि इसका पता शुरुआती चरणों में चल जाए। उपचार में सर्जरी, कीमोथेरेपी, रेडिएशन थेरेपी और लक्षित थेरेपी शामिल हो सकते हैं। कुछ संक्रमणों (जैसे एच. पाइलोरी, हेपेटाइटिस सी) का इलाज करके कैंसर के जोखिम को कम किया जा सकता है।
हाँ, कुछ संक्रमण बचपन में ही हो सकते हैं और बाद में कैंसर का जोखिम बढ़ा सकते हैं। उदाहरण के लिए, हेपेटाइटिस बी वायरस का संक्रमण जन्म के समय या बचपन में हो सकता है। एचपीवी टीकाकरण बच्चों और किशोरों में भविष्य में होने वाले एचपीवी-संबंधित कैंसर को रोकने के लिए अत्यधिक अनुशंसित है।
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